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हेपेटोमेगाली - यकृत का बढ़ा हुआ आकार (Enlarged Liver)

30 november 2025

हेपेटोमेगाली - यकृत का बढ़ा हुआ आकार (Enlarged Liver)

यकृत (लीवर) हमारे शरीर का एक अहम अंग है, जो भोजन का पाचन, विषाक्त पदार्थों को हटाना, और ऊर्जा भंडारण जैसे कई ज़िम्मेदारियाँ निभाता है। जब किसी कारणवश लीवर की कोशिकाओं या रक्त प्रवाह में असंतुलन हो जाता है, तो लीवर सामान्य आकार से बढ़ सकता है। इस स्थिति को हेपेटोमेगाली (Hepatomegaly / enlarged liver) कहते हैं।

लक्षण (Symptoms)

  • अक्सर, प्रारंभिक अवस्था में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते।
  • यदि लीवर काफी बढ़ा हो जाए, तो पेट में गर्भनिरोध जैसा महसूस, बेल-बelly fullness, या ऊपर दायीं ओर पेट में दर्द / बेचैनी हो सकती है।
  • अन्य सम्भावित लक्षण: थकावट (fatigue), भूख कम लगना, जी मिचलाना, उल्टी, पीलिया (skin/eyes yellowing), मूत्र या मल का रंग बदलना, खुजली, वजन घटना, और यदि लिवर या पित्त नलियों में समस्या हो तो पैर-टांगों में सूजन।

कारण - क्यों लीवर बढ़ता है (Causes)

हेपेटोमेगाली कई कारणों से हो सकती है; कुछ सामान्य कारण इस प्रकार हैं:

  • फैटी लीवर रोग - शराब से संबंधित (Alcoholic fatty liver) या गैर-शराबी (Non-alcoholic fatty liver disease, NAFLD)। मोटापा, अनिय्मित भोजन, उच्च कोलेस्ट्रॉल आदि इससे जुड़े हो सकते हैं। 
  • वायरल / विषाक्त हेपेटाइटिस, पित्त (bile) नलियों की रुकावट, दवाओं या विषाक्त पदार्थों की वजह से लीवर की सूजन।
    रक्त प्रवाह या हृदय संबंधी समस्याएं, जिससे लीवर में रक्त का जमाव हो जाए।
  • लीवर में ट्यूमर (benign या malignant) - जैसे प्राथमिक लीवर कैंसर या शरीर के किसी अन्य हिस्से से मेटास्टैसिस।
  • चयापचय या आनुवंशिक विकार - कुछ विरासत में मिलने वाले रोग, जो लीवर की कोशिकाओं या संचित पदार्थों की मात्रा बदल देते हैं।

निदान और जाँच (Diagnosis)

यदि डॉक्टर को शक हो कि लीवर बढ़ा हुआ है, तो वह सबसे पहले पेट की शारीरिक परीक्षा करेगा। इसके बाद आवश्यक हो तो ये जाँचें की जा सकती हैं:

  • अल्ट्रासाउंड, सीटी-स्कैन (CT), या एमआरआई (MRI) - लीवर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए।
  • लीवर एंजाइम टेस्ट, रक्त परीक्षण (CBC व अन्य) - यह देखने के लिए कि लीवर ठीक तरह से काम कर रहा है या नहीं, और कहीं संक्रमण, सूजन, या अन्य कारण तो नहीं।

बचाव और देखभाल (Prevention & Care)

  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं - संतुलित भोजन, तैलीय/फैटी भोजन से बचें, वसायुक्त और जंक फूड कम करें।
  • यदि शराब पीते हैं, तो इसे छोड़ दें या सीमित करें।
  • मोटापे, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल आदि को नियंत्रित रखें।
  • अनावश्यक दवाओं, हर्बल सप्लीमेंट्स, रसायनों आदि का उपयोग सावधानी से करें - बिना डॉक्टर सलाह के न लें।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच रखें - विशेषकर यदि किसी प्रकार की यकृत समस्या, हेपेटाइटिस या फैटी लीवर की उम्मीद हो।

हेपेटोमेगाली- यकृत का बढ़ा हुआ आकार - अक्सर किसी अन्य बीमारी या असंतुलन का संकेत होता है। शुरुआत में लक्षण न दिखना आम है, इसलिए समय-समय पर जांच कराना बुद्धिमानी है। यदि सही समय पर कारण समझकर उपचार व जीवनशैली में सुधार किया जाए, तो लीवर की सेहत फिर से बेहतर की जा सकती है।

याद रखें - लीवर अकेला अंग नहीं है, बल्कि आपकी सम्पूर्ण सेहत का हिस्सा है। पर्याप्त देखभाल, संतुलित आहार और जागरूकता ही बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में पहला कदम है।