
राजयोग वह विशेष ग्रह संयोजन है जो व्यक्ति को सामान्य से ऊपर उठाकर समाज में विशेष स्थान दिलाता है। Astrologer in Delhi, ज्योतिषाचार्य राममेहर शर्मा के अनुसार, जब केंद्र (1, 4, 7, 10 भाव) और त्रिकोण (1, 5, 9 भाव) के स्वामी ग्रह आपस में शुभ संबंध बनाते हैं, तो राजयोग का निर्माण होता है, जो व्यक्ति को मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और सफलता प्रदान करता है।
राजयोग के मुख्य लाभ:
अब आइए जानते हैं 7 प्रमुख राजयोगों के बारे में।
जब चंद्रमा से केंद्र में बृहस्पति स्थित हो, तब गजकेसरी योग बनता है।
यह योग व्यक्ति को हाथी (गज) की स्थिरता और सिंह (केसरी) की शक्ति प्रदान करता है। यदि यह योग मजबूत अवस्था में हो, तो व्यक्ति राजनीति, प्रशासन या शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकता है।
यह योग पाँच अलग-अलग ग्रहों से बनता है:
जब ये ग्रह केंद्र भाव में अपनी उच्च या स्वराशि में हों।
यह योग व्यक्ति को विशिष्ट और प्रभावशाली बनाता है।
जब नवम भाव (भाग्य) और दशम भाव (कर्म) के स्वामी ग्रह आपस में युति या दृष्टि संबंध बनाते हैं।
यह योग व्यक्ति के कर्म और भाग्य को एक साथ मजबूत करता है।
जब नवम भाव का स्वामी मजबूत हो और लग्नेश भी बलवान हो।
लक्ष्मी योग जीवन में आर्थिक स्थिरता और समृद्धि प्रदान करता है।
जब चंद्रमा और मंगल एक साथ हों या परस्पर दृष्टि में हों।
यह योग व्यवसायियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
यह योग सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यह संघर्ष के बाद सफलता देता है।
जब 6, 8, या 12 भाव के स्वामी आपस में युति करें।
ऐसे लोग जीवन में संघर्ष जरूर करते हैं, लेकिन अंततः बड़ी सफलता पाते हैं।
जब कोई ग्रह नीच राशि में हो लेकिन उसकी नीचता का भंग हो जाए।
यह योग व्यक्ति को गिरावट से उठाकर शिखर तक पहुँचा सकता है।
सिर्फ राजयोग होना ही पर्याप्त नहीं है। उसका फल तभी मिलता है जब:
ज्योतिषाचार्य राममेहर शर्मा, जो एक प्रसिद्ध Astrologer in Delhi हैं, के अनुसार कई लोगों की कुंडली में राजयोग होते हुए भी उन्हें उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता, क्योंकि ग्रह कमजोर या अस्त अवस्था में होते हैं।